
पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने आशंका जताई है कि रूस के Su-57 फाइटर जेट की खरीद से भारत के स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम को नुकसान हो सकता है। इंडिया टुडे के पॉडकास्ट 'चक्रव्यूह' में उन्होंने कहा कि अगर भारत Su-57 खरीदता है तो इससे AMCA के लिए जरूरी फंड, मेहनत और संस्थागत ध्यान बंट सकता है। भदौरिया ने कहा कि दोनों परियोजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए संसाधन और ऊर्जा मुहैया कराना चुनौतीपूर्ण होगा।
भदौरिया के अनुसार, भारत को लंबी अवधि में अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित करना जरूरी है। AMCA फिलहाल विकास के चरण में है और इसके प्रोटोटाइप के 2028 में आने की उम्मीद है, लेकिन सेवा में 2035 से पहले शामिल होने की संभावना कम है। इसी अंतराल को भरने के लिए सरकार कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 36) Su-57 खरीदने पर विचार कर रही है। भदौरिया ने यह भी कहा कि सिर्फ वायुसेना और रक्षा मंत्रालय को विदेशी विकल्प छोड़ने की बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि AMCA पर काम कर रही एडीए और एचएएल को भी ठोस प्रगति दिखानी होगी।
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने LCA Mk2 प्रोग्राम में देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि LCA Mk2 को पिछले साल उड़ान भर लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह देरी वायुसेना के लिए चिंता का कारण है। उन्होंने कहा कि AMCA को प्राथमिकता बनाए रखने के लिए एचएएल और एडीए को तेजी से नतीजे देने होंगे।
Source: bazaar.businesstoday.in
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