
Samajwadi Party president Akhilesh Yadav said the party’s PDA framework includes Pandits, or Brahmins, at a conference in Lucknow. The Hindu dates the event to August 5, while Times Now News reports…
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि पार्टी के पीडीए (PDA) ढांचे में पंडित यानी ब्राह्मण भी शामिल हैं। द हिंदू ने इस कार्यक्रम की तारीख 5 अगस्त बताई है जबकि टाइम्स नाउ न्यूज ने इसे 6 अगस्त को आयोजित होना बताया है। पीडीए का मूल अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है और समाजवादी पार्टी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ही इस फार्मूले का उपयोग कर रही है।

यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर विपक्षी कार्यकर्ताओं, ब्राह्मणों और धार्मिक नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक शंकराचार्य को पवित्र स्नान करने से रोका गया और उन पर झूठा पॉक्सो (POCSO) मुकदमा दर्ज किया गया। इन आरोपों की पुष्टि किसी भी रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है। विश्लेषक असद रिजवी ने द हिंदू को बताया कि इस कवायद का उद्देश्य पारंपरिक रूप से भाजपा से जुड़े ब्राह्मण मतदाताओं को आकर्षित करना है।
आसान निष्कर्ष यह निकाला जा सकता है कि अब हर ब्राह्मण मतदाता सपा की ओर झुक जाएगा, वहीं दूसरा दावा यह है कि जातीय समीकरणों का चुनावी मूल्य कुछ नहीं होता है। इस घटना से इनमें से कोई भी निष्कर्ष नहीं निकलता है। यादव ने एक स्पष्ट गठबंधन का दांव चला है, लेकिन रिपोर्टों में कोई चुनावी साक्ष्य नहीं दिया गया है और सरकार, धार्मिक संस्थानों या पॉक्सो मामले पर उनके आरोपों की पुष्टि भी नहीं की गई है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सपा इस संदेश को 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों, स्थानीय संगठन और वोटों में बदल पाती है।
स्रोत (2): thehindu.com, timesnownews.com
यह लेख ऊपर दिए गए 2 स्रोतों से एआई (AI) द्वारा संकलित किया गया है।
अपडेट: यह खबर अब 2 स्रोतों पर आधारित है।