
Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju has said that several Opposition MPs privately asked him to speak to Congress leader Rahul Gandhi and Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav so that contentious bills could…
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कई विपक्षी सांसदों ने उनसे निजी तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से बात करने का आग्रह किया ताकि संसद में विवादास्पद विधेयकों पर चर्चा हो सके। मानसून सत्र के 12 विधेयकों के पारित होने के बाद लेकिन बिना किसी सार्थक बहस के समाप्त होने पर एक साक्षात्कार में रिजिजू ने दावा किया कि कई सांसद चर्चा में भाग लेना चाहते थे लेकिन उनके नेतृत्व ने बाधा डाली।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विधेयक पेश करने से पहले विपक्ष से परामर्श किया था और बिना सहमति कानून थोपने के आरोपों को खारिज किया। मंत्री ने जोड़ा कि सरकार ने हंगामे के बीच महिला आरक्षण विधेयक जैसे संवैधानिक संशोधनों पर जोर नहीं दिया और इसके बजाय एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इस सत्र ने संसदीय जांच की प्रक्रिया को कमजोर किया है।
दोनों पक्ष सत्र की विफलता के लिए एक दूसरे को दोषी ठहराना चाहते हैं लेकिन जनता इस नाटक को बखूबी समझती है। रिजिजू का यह दावा कि सांसदों ने उनसे हस्तक्षेप की गुहार लगाई पार्टी नेतृत्व और उनके अपने विधायकों के बीच के बिखराव को उजागर करता है। यदि व्यक्तिगत सांसद वास्तव में चर्चा करना चाहते थे तो वे सदन में अपनी बात उठा सकते थे। असली परीक्षा शीतकालीन सत्र की होगी कि क्या दोनों पक्ष चर्चा के लिए तैयार दिखेंगे या फिर एक बार फिर वॉकआउट और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिलेगा।
स्रोत: indiatoday.in
यह समाचार एआई द्वारा स्रोत से तैयार किया गया है।