
Markets regulator SEBI has reduced the timeline for listing of shares after an initial public offering (IPO) from T+6 days to T+3 days. This means investors will get credit of shares or…
बाजार नियामक सेबी ने प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के बाद शेयरों की लिस्टिंग की समय सीमा को T+6 दिन से घटाकर T+3 दिन कर दिया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को ऑफर बंद होने के तीन कार्य दिवसों के बाद शेयरों का क्रेडिट या रिफंड मिल जाएगा।
यह नया नियम शुरू में वैकल्पिक होगा और बाजार की तैयारी के बाद इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा। सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने कहा कि इस कदम से वह अवधि कम हो जाएगी जिसमें आईपीओ का फंड लॉक रहता है और इससे जारीकर्ताओं के लिए कारोबार करने में आसानी होगी।
तेजी से लिस्टिंग उन खुदरा निवेशकों के लिए अच्छी खबर है जिनका पैसा आईपीओ के बाद लगभग एक सप्ताह तक फंसा रहता था। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ब्रोकर, रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज कितनी सुगमता से इसके अनुकूल ढलते हैं। सेबी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि T+3 समय सीमा आवंटन या रिफंड में त्रुटियों का कारण न बने, जो अभी भी आम शिकायतें हैं। क्या नियामक खुदरा बोलीदाताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को भी ठीक करेगा, जो अक्सर बड़े सब्सक्रिप्शन के कारण अवसर चूक जाते हैं। स्वच्छ बाजार छोटे निवेशकों के लिए सरल नियमों पर निर्भर करते हैं।
स्रोत: dnaindia.com
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