
Routine antenatal screening at an Apollo TeleHealth-supported primary health centre in remote Manipur detected syphilis in a 25-year-old pregnant woman from Miran village, preventing transmission to her unborn child. Her lab result…
मणिपुर के सुदूर इलाके में अपोलो टेलीहेल्थ समर्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नियमित जांच के दौरान मिरान गांव की एक 25 वर्षीय गर्भवती महिला में सिफलिस का पता चला जिससे उसके अजन्मे बच्चे में संक्रमण को रोका जा सका। महिला की लैब रिपोर्ट को डिजिटल गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली के माध्यम से प्रमाणित किया गया और उसके बाद उसे बेंजाथीन पेनिसिलिन की पहली साप्ताहिक खुराक दी गई। पुनः संक्रमण से बचने के लिए उसके पति का भी उपचार किया गया जो जांच में पॉजिटिव पाया गया था।
मणिपुर सरकार के साथ साझेदारी में चलाई जा रही इस पहल ने बोरोबेकरा, हेंगलेप, सेनवोन और थानलॉन में चार केंद्रों के माध्यम से 6,000 से अधिक मरीजों को सेवा प्रदान की है और 1,500 से अधिक प्रसवपूर्व जांचों में सहायता की है। लाभार्थियों में 56 प्रतिशत महिलाएं हैं। चूंकि महिला को अपने अंतिम मासिक धर्म की तारीख याद नहीं थी इसलिए उसे प्रसूति अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई है।
यह धारणा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवा केवल शहरी भारत के काम आती है मिरान गांव के इस मामले के सामने धराशायी हो जाती है। एक गर्भवती महिला की जांच हुई और टेलीहेल्थ प्रणाली के माध्यम से दूरस्थ रूप से लैब रिपोर्ट प्रमाणित होने के कारण उसका सिफलिस का उपचार संभव हुआ। असली परीक्षा यह है कि क्या यह एक सामान्य प्रक्रिया बन जाएगी या यह सिर्फ एक सुखद खबर बनकर रह जाएगी। ऐसे कितने मामले बिना पहचान के रह जाते होंगे जहां ई-पीएचसी मौजूद नहीं है?
स्रोत: indiatoday.in
यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।