
क्वांटम एएमसी की फंड मैनेजर स्नेहा पांडे ने डेट म्यूचुअल फंड में निवेश का सही तरीका समझाया। उनके अनुसार, निवेशक को पहले अपने वित्तीय लक्ष्य की अवधि तय करनी चाहिए, फिर उसी समयसीमा वाला फंड चुनना चाहिए। एक साल के लक्ष्य के लिए लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन या एक साल की एफडी उपयुक्त है। तीन साल के लिए शॉर्ट से मीडियम ड्यूरेशन फंड बेहतर हैं। पांच साल या उससे अधिक के लिए मीडियम ड्यूरेशन या डायनेमिक बॉन्ड स्ट्रैटेजी पर विचार किया जा सकता है।

एक्सपर्ट ने चेतावनी दी कि लंबी अवधि के डेट पोर्टफोलियो में कम क्रेडिट क्वालिटी वाले विकल्प जोड़कर जोखिम नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि लंबी मैच्योरिटी में पहले से ही ब्याज दर का जोखिम होता है। डेट निवेश का मकसद सिर्फ सबसे अधिक यील्ड नहीं है, बल्कि पोर्टफोलियो को स्थिरता और इक्विटी में उतार-चढ़ाव के दौरान संतुलन देना है। उन्होंने रिटर्न से ज्यादा लक्ष्य, अवधि और जोखिम क्षमता को महत्व देने पर जोर दिया।
यह सलाह ऐसे समय में आई है जब रिज़र्व बैंक ने जून 2026 में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.75% कर दी, जिससे डेट फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बढ़ा। भारतीय डेट म्यूचुअल फंड उद्योग का AUM मार्च 2026 तक ₹11.7 लाख करोड़ था, जिसमें से लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंडों की हिस्सेदारी 35% से अधिक है। निवेशकों को SEBI के मैकॉले ड्यूरेशन नियमों के दायरे में फंड चुनते समय क्रेडिट रेटिंग और दर-चक्र दोनों का मिलान अपने समय-क्षितिज से करना चाहिए। अगला RBI मौद्रिक नीति निर्णय 4 अक्टूबर 2026 को है, जो शॉर्ट-ड्यूरेशन फंडों के लिए अगला महत्वपूर्ण संकेत होगा।
Source: bazaar.businesstoday.in
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