
केंद्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के पास अरब सागर के किनारे गंगेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यहां चट्टानों के बीच पांच शिवलिंग एक साथ विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार…
केंद्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के पास अरब सागर के किनारे गंगेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यहां चट्टानों के बीच पांच शिवलिंग एक साथ विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान ये शिवलिंग स्थापित किए थे।

खास बात यह है कि जब समुद्र में ज्वार आता है तो लहरें चट्टानों के बीच से होते हुए सीधे शिवलिंग तक पहुंचती हैं और प्राकृतिक जलाभिषेक करती हैं। सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए ज्वार-भाटा के समय का ध्यान रखना जरूरी है।
गंगेश्वर महादेव मंदिर की कहानी में आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम है, लेकिन इसे पौराणिक चमत्कार बताना एकतरफा होगा। पांडवों के आने का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह समुद्री ज्वार का सामान्य भूगोल है जो चट्टानों के बीच पानी भर देता है। सच्ची बात यह है कि ऐसी मान्यताएं पर्यटन बढ़ाती हैं, लेकिन सवाल उठता है: क्या हम हर प्राकृतिक घटना को महाभारत से जोड़कर विज्ञान की अनदेखी कर रहे हैं?
Sources (2): aajtak.in, tupaki.com
This story was synthesised by AI from the 2 sources linked above. Methodology and corrections.
Updated: this story now draws on 2 sources.