
सिनेमा हॉल और रेस्टोरेंट में पैकेटबंद सामान (जैसे पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक, चिप्स) को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना कानूनी रूप से अवैध है। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत किसी भी पैकेटबंद वस्तु पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से एक रुपया भी अधिक वसूलना दंडनीय अपराध है। उपभोक्ता कानूनों के अनुसार, निर्माता कंपनी द्वारा तय की गई एमआरपी में टैक्स, ट्रांसपोर्ट और दुकानदार का मुनाफा शामिल होता है।

अक्सर सिनेमा हॉल या रेस्टोरेंट वाले सर्विस चार्ज या एसी का बिल बताकर अतिरिक्त राशि लेते हैं, लेकिन भारत सरकार के नियमों के अनुसार यह उल्लंघन है। कानूनन, कोई भी व्यापारी किसी पैकबंद सामान पर छपी एमआरपी से अधिक नहीं वसूल सकता। यह सख्त प्रावधान लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में बताया गया है।
भारतीय दंड संहिता और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत एमआरपी से अधिक शुल्क लेना अवैध है, फिर भी सिनेमा हॉल और रेस्टोरेंट इसका उल्लंघन करते हैं। अमर उजाला का यह लेख स्थिति को समझाते हुए ‘लॉल’ और ‘ग्राहक की जेब कटना’ जैसे भावनात्मक शब्दों का प्रयोग करता है जो संवेदना जगाते हैं, लेकिन इसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि शिकायत कैसे दर्ज करें या किन सबूतों की जरूरत है। अगला कदम उपभोक्ता के पास है: वह हेल्पलाइन नंबर या कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराए।
Source: amarujala.com
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