
देश के दो शीर्ष सेब उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इस साल (2026) पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सेब के दाम बढ़ने की संभावना है। हिमाचल में पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस साल 3.87 लाख टन सेब बाजार में पहुंचा है। जम्मू-कश्मीर में उत्पादन 40 फीसदी तक घट गया है।

दोनों राज्यों में प्रतिकूल मौसम, विशेषकर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 50 फीसदी तक कम हो गया है। सामान्य वर्षों में 20 से 22 लाख टन उत्पादन होता था, मगर इस बार इसके 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से ठंड के घंटे कम हुए और हिमाचल में सेब सीजन 15 दिन देरी से शुरू हुआ।
उत्पादन घटने से मंडियों में आपूर्ति कम हो गई है और बेहतर गुणवत्ता वाले सेब के भाव चढ़ गए हैं। पिछले साल (2025) हिमाचल में सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था, जो इस साल (2026) बहुत कम रह सकता है।
उत्पादन में गिरावट का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि आपूर्ति कम होने से सेब के दाम बढ़ने तय हैं। सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू-कश्मीर के बागवानों को हुआ है, जहां 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम की मार से कुछ क्षेत्रों में तो उत्पादन आधा रह गया है। हिमाचल में सेब सीजन में 15 दिन की देरी और ड्रॉपिंग बढ़ने से भी नुकसान हुआ है। अनुमान है कि कुल उत्पादन 14 से 15 लाख टन के बीच रह सकता है, जो सामान्य से काफी कम है। आगे सेब की कीमतें मंडियों में आपूर्ति और गुणवत्ता पर निर्भर करेंगी।
Source: amarujala.com
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