
स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी एआई अपनाने के साथ अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का संतुलन बदलने जा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बैंक की भर्ती बढ़ सकती है। ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग…
स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी एआई अपनाने के साथ अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का संतुलन बदलने जा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बैंक की भर्ती बढ़ सकती है। ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तनुज कपिलाश्रमी ने बुधवार को कहा कि भारत जैसे बाजारों में हेडकाउंट बढ़ने की उम्मीद है। बैंक अब साझा सेवा केंद्रों, खासकर भारत में, ज्यादा 'सोफिस्टिकेटेड वर्क' कर रहा है।
भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) में करीब 22,000 कर्मचारी हैं। बैंक की कुल ग्लोबल वर्कफोर्स 81,000 से कुछ ज्यादा है और करीब 50,000 कर्मचारियों को एआई की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। मई में बैंक ने अगले चार साल में करीब 8,000 सपोर्ट रोल खत्म करने की योजना बताई थी। बैंक एआई से उत्पादकता में फायदा और कॉस्ट टू इनकम रेश्यो में सुधार देख रहा है।
यह खबर भारत में एआई के चलते नौकरियों जाने का डर फिर से जगाती है, लेकिन आंकड़े दूसरी तस्वीर दिखाते हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड 8,000 सपोर्ट रोल्स काट रहा है, वहीं भारत में उच्च कुशल काम के लिए भर्ती बढ़ाएगा। सवाल यह है कि क्या नेट नौकरियां बढ़ेंगी या सिर्फ बदलेंगी? असली टेस्ट तब होगा जब बैंक अगले चार साल के हेडकाउंट आंकड़े जारी करेगा। तब पता चलेगा कि एआई ने भारत में कुल रोजगार पर क्या असर डाला है।
Source: bazaar.businesstoday.in
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