बेंगलुरु में पहली बार प्रदर्शित होगी बोतिचेली की मैडोना एंड चाइल्ड

‘Madonna and Child’ coming to Bengaluru museum

Italian master Sandro Botticelli's Madonna and Child (c. 1490) will be shown in India for the first time at an exhibition in Bengaluru from August 20 to September 20. The National Gallery…

संक्षेप में खबर

इतालवी उस्ताद सैंड्रो बोतिचेली की मैडोना एंड चाइल्ड (लगभग 1490) को पहली बार भारत में 20 अगस्त से 20 सितंबर तक बेंगलुरु में एक प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा। नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) बेंगलुरु, इतालवी वाणिज्य दूतावास और संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से ‘वन मदर, मेनी मदर टंग्स’ का आयोजन कर रहे हैं।

यह प्रदर्शनी सदियों और संस्कृतियों के बीच मातृत्व को दर्शाती है। इसमें बोतिचेली की कलाकृति के साथ प्राचीन एट्रस्कैन मूर्तियों और भारतीय कलाकृतियों को रखा गया है। इनमें मथुरा संग्रहालय से कुषाण काल की हारीति और उदयपुर के पास एक मंदिर से प्राप्त स्कंदमाता शामिल हैं। महावाणिज्य दूत जियानडोमेनिको मिलानो ने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष से पहले एक मील का पत्थर है।

द इंडियन ओपिनियन

इसे ‘सांस्कृतिक मील का पत्थर’ बताने वाली सुर्खियां कला के नजरिए से तो सही हैं लेकिन ये प्रांतीय भारतीय संग्रहालयों की उपेक्षा को नजरअंदाज करती हैं। थानेश्वर के एक सुदूर मंदिर से लाई गई स्कंदमाता इस उपेक्षा पर एक खामोश सवाल है। असली परीक्षा तो दर्शकों की उपस्थिति है। क्या बेंगलुरु के लोग पुनर्जागरण कालीन मास्टरपीस देखने के लिए उतनी ही भीड़ जुटाएंगे जितनी वे क्रिकेट मैच के लिए जुटाते हैं?


स्रोत: timesofindia.indiatimes.com

यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।

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