
The Centre spent Rs 3.4 lakh crore on capital expenditure in April-June, about 28% of its Rs 12.22 lakh crore FY27 allocation, Finance Ministry data showed. Total expenditure reached Rs 13.57 lakh…
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार केंद्र ने अप्रैल-जून में पूंजीगत व्यय पर 3.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जो वित्त वर्ष 2027 के 12.22 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का लगभग 28 प्रतिशत है। कुल व्यय 13.57 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया जो वार्षिक अनुमान का 25.4 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा 3.08 लाख करोड़ रुपये या पूरे साल के लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत रहा जो पिछले साल की इसी अवधि में 17.9 प्रतिशत था।

कुल प्राप्तियां 10.49 लाख करोड़ रुपये रहीं जिसमें 6.37 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध कर राजस्व और 3.78 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व शामिल है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार पूंजीगत व्यय में साल दर साल 23.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि राजस्व व्यय 7.4 प्रतिशत बढ़ा। केंद्र ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पहली तिमाही के आंकड़े कर लाभांश और जीएसटी प्रवाह में असमानता के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
सबसे मुखर विमर्श वही हैं जो पहले से सुने-सुनाए हैं कि घाटे में कोई भी वृद्धि राजकोषीय लापरवाही साबित करती है या फिर पूंजीगत व्यय का हर रुपया अपने आप विकास की गारंटी देता है। इन आंकड़ों से ऐसा कुछ भी नहीं निकलता। सार्वजनिक निवेश मांग का समर्थन तो कर सकता है लेकिन इसका मूल्य पूरी हो चुकी परियोजनाओं उपयोगी संपत्तियों और बाद में आने वाले निजी निवेश पर निर्भर करता है। यूरिया सब्सिडी का जल्द उपयोग भी जांच के दायरे में है क्योंकि उर्वरक की कीमतों में निरंतरता बाद में बजट पर दबाव डाल सकती है। स्पष्ट परीक्षा यह है कि क्या केंद्र उत्पादक खर्चों को बनाए रखते हुए अपने 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के भीतर बना रहता है।
स्रोत (2): livemint.com, livemint.com (2)
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