
Pune residents are using the monsoon season to swap plant cuttings, saplings and seeds through WhatsApp groups and community meetups, expanding their gardens at low cost. The trend has grown from apartment…
पुणे के निवासी मानसून का लाभ उठाते हुए व्हाट्सएप समूहों और सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से पौधों की कटिंग, छोटे पौधे और बीज आपस में बदल रहे हैं जिससे वे कम खर्च में अपने बगीचे का विस्तार कर पा रहे हैं। यह चलन अब अपार्टमेंट सोसायटियों से निकलकर एम्प्रेस गार्डन जैसी जगहों पर अनौपचारिक सभाओं तक पहुंच गया है। बागवानी के शौकीनों का कहना है कि बारिश के मौसम की नमी और ठंडक के कारण पौधों का पनपना आसान हो जाता है जो नए बागवानों को भी आकर्षित कर रहा है। कुछ लोग इंस्टाग्राम पर मुफ्त में पौधे बांटकर सैकड़ों कटिंग और बल्ब दूसरों को दे रहे हैं। पाषाण की निवासी शीतल झावेरी ने कहा कि मानसून आदान-प्रदान के लिए सबसे अच्छा समय है।
आमतौर पर यह माना जाता है कि बागवानी केवल अमीरों का महंगा शौक है। लेकिन पुणे में मानसून के दौरान पौधों की अदला-बदली इस धारणा को बदल रही है। बालकनी में बागवानी करने वाले लोग और अपार्टमेंट सोसायटियां बिना किसी खर्च के पौधों का आदान-प्रदान कर रही हैं। समुदाय आधारित यह प्रयास साबित करता है कि हरियाली के लिए भारी बजट की जरूरत नहीं है। असली परीक्षा बारिश के बाद होगी जब यह देखना होगा कि इनमें से कितने पौधे जीवित रहते हैं और क्या यह चलन व्हाट्सएप समूहों से आगे सार्वजनिक स्थानों तक भी पहुंचता है।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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