
A State Information Commission (SIR) report has highlighted a troubling identity crisis faced by women from other states who married Haryana men and settled there. Many have lived in Haryana for decades,…
राज्य सूचना आयोग (SIR) की एक रिपोर्ट में उन महिलाओं के सामने आ रहे गंभीर पहचान संकट पर प्रकाश डाला गया है जो दूसरे राज्यों से आकर हरियाणा में बसी हैं। इनमें से कई महिलाएं दशकों से हरियाणा में रह रही हैं। उन्होंने अपना परिवार बसाया और कई चुनावों में मतदान भी किया है। इसके बावजूद 2002 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता का नाम न होने के कारण उन्हें अपनी चुनावी पहचान साबित करने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि मतदाता पंजीकरण के मामले में इन महिलाओं के साथ गैर-निवासी जैसा बर्ताव किया जा रहा है जिससे प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं। पैनल ने इन लंबे समय से रह रहीं निवासियों को उनका मताधिकार दिलाने के लिए एक सरल और संवेदनशील प्रक्रिया अपनाने का आह्वान किया है।
यह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया नैरेटिव कि ये महिलाएं व्यवस्था का फायदा उठाने वाली बाहरी हैं। यह उनके दशकों के निवास और नागरिक भागीदारी को नजरअंदाज करता है। असली परीक्षा प्रशासनिक है कि क्या चुनाव आयोग और राज्य तंत्र 20 साल पुरानी मतदाता सूची को ही एकमात्र प्रमाण मानने की जिद छोड़े बिना नामों को शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी ला सकते हैं। आंकड़ों के सार्वजनिक होने पर ही पता चलेगा कि यह एक व्यवस्थित विफलता है या कोई छोटा-मोटा मुद्दा।
स्रोत: ndtv.com
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