
Torrential rain in Uttar Pradesh's Bijnor district on Friday submerged several rural roads and left vehicles stranded, disrupting daily life. The downpour brought relief from intense heat but caused widespread waterlogging, India…
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश से कई ग्रामीण सड़कें जलमग्न हो गईं और वाहन फंस गए जिससे दैनिक जीवन अस्त व्यस्त हो गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भीषण गर्मी से राहत तो मिली लेकिन व्यापक जलभराव ने मुश्किलें बढ़ा दीं। फरीदपुर मान गांव में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया जिससे वाहन चालकों को अपने दोपहिया वाहन धक्का देकर ले जाने पड़े।
निवासियों का कहना है कि जल निकासी की लचर व्यवस्था के कारण स्थिति और खराब हो गई है और घरों के आसपास पानी जमा हो गया है। स्कूली बच्चों और यात्रियों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने जल निकासी में सुधार की मांग की है और चेतावनी दी है कि जमा पानी से स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने की उम्मीद है।
हर मानसून में बिजनौर के गांव डूब जाते हैं और हर साल मांग एक ही रहती है कि उचित नालियां बनाई जाएं। यह कोई दैवीय आपदा नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की विफलता है। जो बारिश गर्मी से राहत देती है वही यह भी दिखा देती है कि कहां बुनियादी ढांचा काम कर रहा है और कहां नहीं। असली परीक्षा यह नहीं है कि बारिश कब रुकेगी बल्कि यह है कि पानी 24 घंटे के भीतर निकल जाए। यदि पानी जमा रहता है तो सवाल यही बना रहता है कि बंद नालियों के लिए कौन जवाबदेह है।
स्रोत: indiatoday.in
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