
इमरान हाशमी की फिल्म आवारापन 2 की रिलीज के बाद उनके परिवार का फिल्मी इतिहास चर्चा में है। आजतक के मुताबिक, उनकी दादी मेहर बानो ने फिल्मों में पूर्णिमा दास वर्मा नाम…
इमरान हाशमी की फिल्म आवारापन 2 की रिलीज के बाद उनके परिवार का फिल्मी इतिहास चर्चा में है। आजतक के मुताबिक, उनकी दादी मेहर बानो ने फिल्मों में पूर्णिमा दास वर्मा नाम से पहचान बनाई थी। उन्होंने 16 साल की उम्र में अभिनय शुरू किया और 1949 की पतंगा से खास पहचान मिली।

पूर्णिमा दास वर्मा को 1940 और 1950 के दशक में उनकी खूबसूरती और अभिनय के लिए आधी नरगिस और आधी मधुबाला कहा जाता था। उन्होंने जोगन, सगाई, जाल, औरत, मेरा गांव मेरा देश, जंजीर और नाम जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी दो शादियां हुईं और वह इमरान हाशमी के अभिनेता बनने पर गर्व महसूस करती थीं।

फिल्मी परिवारों पर चलने वाली ‘स्टारडम सिर्फ विरासत से मिलती है’ जैसी आसान धारणा पूर्णिमा दास वर्मा की कहानी से पूरी तरह साबित नहीं होती। उन्होंने कम उम्र में अवसर जरूर पाया, लेकिन पहचान कई फिल्मों और वर्षों के काम से बनी। दूसरी ओर, पुरानी अभिनेत्रियों की तुलना को आज की लोकप्रियता से सीधे जोड़ना भी ठीक नहीं। उनकी फिल्मों का दोबारा मूल्यांकन ही बताएगा कि यह विरासत कितनी मजबूत है।
Sources (2): aajtak.in, tupaki.com
This story was synthesised by AI from the 2 sources linked above.
Updated: this story now draws on 2 sources.