
मुजफ्फरपुर की एक 12वीं की छात्रा, जो 10 मई को भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली थी, 85 दिनों बाद भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया से बरामद कर…
मुजफ्फरपुर की एक 12वीं की छात्रा, जो 10 मई को भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली थी, 85 दिनों बाद भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया से बरामद कर ली गई। पुलिस के अनुसार, वह मुजफ्फरपुर जंक्शन पर एक युवक के झांसे में आ गई, जिसने कोलकाता में नौकरी दिलाने का वादा किया। वहाँ उसे कथित तौर पर रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया, फिर एक महीने बाद भागलपुर ले जाया गया। मुजफ्फरपुर पुलिस की स्पेशल टीम ने 52 मिनट के संघर्ष के बाद उसे और वहाँ से नालंदा की एक और किशोरी को मुक्त कराया। छात्रा का कोर्ट में बयान दर्ज किया गया है और वह अपनी बड़ी बहन के साथ रहना चाहती है। पुलिस अब तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
इस घटना में मानव तस्करी के खिलाफ पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी दिखाती है कि घरेलू झगड़े कितनी आसानी से बच्चों को अपराधियों के हाथों धकेल सकते हैं। मीडिया कवरेज में अक्सर ऐसे मामलों को सनसनीखेज बनाकर पेश किया जाता है, जबकि सवाल यह है कि रेड लाइट एरिया में इतने दिनों तक एक नाबालिग को कैसे रखा गया और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी? अब देखना होगा कि तस्करी के नेटवर्क के तार कहाँ तक जाते हैं और क्या कोई बड़ा अधिकारी इस मामले में जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
Source: aajtak.in
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