लाल किले से मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर कांग्रेस का हमला

‘पहले अर्बन और दिमागी नक्सल बुलाते हैं, फिर उन्हीं की बातें…’ जयराम रमेश का PM मोदी पर वार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और समाज को गलत दिशा देने वाले तत्वों को पहचानने की बात कही।…

The Story in Brief

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और समाज को गलत दिशा देने वाले तत्वों को पहचानने की बात कही। उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद को खत्म करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि इनसे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पहले अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते हैं और बाद में उन्हीं की मांगें स्वीकार करते हैं। उन्होंने जाति जनगणना का उदाहरण दिया और कहा कि दो-तीन वर्ष पहले इसे ऐसी सोच बताया जाता था, जबकि करीब एक वर्ष पहले सरकार ने इसका फैसला लिया। रमेश ने मोदी के भाषण को राजनीतिक बताते हुए कहा कि उसमें नया कुछ नहीं था।

The Indian Opinion

इस विवाद में दोनों तरफ के आसान नैरेटिव से बचना चाहिए। ‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द बिना साफ परिभाषा के राजनीतिक आरोप बन जाते हैं। वहीं, नक्सल हिंसा और उसके मानवीय नुकसान को भी केवल बयानबाजी कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। असली कसौटी यह होगी कि सरकार इन शब्दों के आधार पर किसे निशाना बनाती है और जाति जनगणना पर उसका फैसला कब और कैसे लागू होता है।


Source: aajtak.in

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