
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे तत्वों को पहचानने की जरूरत बताई। उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद को खत्म करने का…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे तत्वों को पहचानने की जरूरत बताई। उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद को खत्म करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि इनसे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
आजतक के अनुसार, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पहले अपने राजनीतिक विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे, जबकि संसद में गृह मंत्री ने कहा था कि ऐसी कोई परिभाषा नहीं है। रमेश ने दावा किया कि सरकार ने बाद में जाति जनगणना जैसी मांगों को स्वीकार किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण को राजनीतिक और पुराना बताया।
‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द राजनीतिक बहस को तेज करते हैं, लेकिन बिना स्पष्ट परिभाषा के वे आलोचकों को एक ही खांचे में डालने का आसान तरीका बन सकते हैं। दूसरी ओर, हिंसक नक्सलवाद और लोकतांत्रिक असहमति को एक मानना भी गलत होगा। इस बहस की कसौटी यह होनी चाहिए कि सरकार इन शब्दों का इस्तेमाल करते समय किन गतिविधियों और प्रमाणों का स्पष्ट उल्लेख करती है।
Sources (2): aajtak.in, tupaki.com
This story was synthesised by AI from the 2 sources linked above.
Updated: this story now draws on 2 sources.