
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें वे धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेशी की मांग कर रही थीं।…
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी, जिसमें वे धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेशी की मांग कर रही थीं। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि जब स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए सीने पर गोलियां खाईं तो सांसद को अंडों से क्यों डर लगता है। मोइत्रा के वकील ने दलील दी थी कि पिछली बार थाने जाने पर उन पर अंडे फेंके गए। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए वकील ने याचिका वापस ले ली। अब 14 अगस्त को उन्हें व्यक्तिगत रूप से जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि मोइत्रा के साथ दुर्व्यवहार न हो।
अदालत की यह टिप्पणी सांसदों की सुरक्षा चिंता को खारिज करने जैसी है, लेकिन सवाल सिर्फ अंडों से डर का नहीं है। एक जनप्रतिनिधि के लिए भीड़ से सुरक्षा पाना उसका अधिकार है। दूसरी ओर, राजनीति में आने पर कठिनाइयां झेलने की उम्मीद भी की जाती है। यह देखना होगा कि 14 अगस्त को मोइत्रा की पेशी शांतिपूर्ण ढंग से हो पाती है या नहीं। क्या पुलिस उचित सुरक्षा मुहैया कराएगी?
Source: aajtak.in
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