
The Allahabad high court on Friday dismissed a PIL that challenged the closure of chicken shops on the Kanwar yatra route in Amroha district during the Sawan month. The petitioner, advocate Nasir…
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें सावन महीने के दौरान अमरोहा जिले में कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन की दुकानें बंद कराने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता नासिर फारूक ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने 30 जुलाई से 24 अगस्त तक मांसाहारी दुकानों को जबरन बंद कराया और उन दुकानों को भी बंद कराया जो यात्रा मार्ग पर नहीं थीं। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिका में किसी भी प्रभावित दुकानदार का नाम नहीं था और इसी अधिवक्ता ने पहले उसी मार्ग पर शराब की दुकानें बंद करने की मांग की थी। इसे दुर्भावनापूर्ण मंशा से दायर की गई पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन करार देते हुए पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने सही मायने में उस जनहित याचिका पर सवाल उठाए जो जनहित से कम और व्यक्तिगत एजेंडे से ज्यादा प्रेरित लग रही थी। जो याचिकाकर्ता कांवड़ मार्ग पर शराब की दुकानें बंद कराना चाहते हैं वे चिकन विक्रेताओं पर लगी पाबंदियों पर उत्पीड़न का रोना नहीं रो सकते। यह आलसी विमर्श कि यह आजीविका पर एकतरफा हमला है याचिकाकर्ता के दोहरे मापदंडों को नजरअंदाज करता है। अब असली परीक्षा यह होगी कि क्या स्थानीय व्यापारी वास्तव में नोटिस को चुनौती देते हैं या फिर यह हमेशा से ही जनहित याचिका के नाम पर केवल पब्लिसिटी स्टंट था।
स्रोत: hindustantimes.com
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