
Lucky Rawat, a 15-year-old Class 10 student from Chakrata, Uttarakhand, is set to return to India on August 15 after reaching the geographic North Pole aboard the nuclear-powered icebreaker 50 Let Pobedy.…
उत्तराखंड के चकराता निवासी 15 वर्षीय 10वीं कक्षा का छात्र लकी रावत, परमाणु ऊर्जा से चलने वाले आइसब्रेकर ’50 लेट पोबेडा’ पर उत्तरी ध्रुव की यात्रा पूरी करने के बाद 15 अगस्त को भारत लौटेगा। वह रूस के ‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ अभियान में 22 देशों के छात्रों के बीच भारत का एकमात्र युवा प्रतिनिधि था, जिसे रूसी परमाणु निगम रोसाटॉम द्वारा आयोजित किया गया था।
लकी ने तीन चरणों वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्राकृतिक विज्ञान क्विज़ और प्रोजेक्ट डिफेंस के जरिए लगभग 5,000 भारतीय आवेदकों को पछाड़कर यह स्थान हासिल किया। इस तैरती यूनिवर्सिटी में उसने ध्रुवीय वैज्ञानिकों के वर्कशॉप और व्याख्यानों में भाग लिया और मिस्र, तंजानिया व दक्षिण अफ्रीका के साथियों के साथ अपने हिमालयी गृह नगर की तस्वीरें साझा कीं। उसने आर्कटिक को चारों ओर फैली सफेद चादर और 24 घंटे के उजाले के रूप में वर्णित किया, जो उसके द्वारा देखे गए वीडियो से कहीं अधिक अद्भुत था।
लकी रावत की कहानी प्रेरणादायक है लेकिन कुछ लोग इसे भारत के वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व का प्रतीक बताकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि यह रोसाटॉम द्वारा संचालित एक रूसी शैक्षिक कार्यक्रम था न कि कोई द्विपक्षीय उपलब्धि। असली परीक्षा यह है कि क्या भारतीय संस्थान अब ऐसी प्रतिभाओं को व्यवस्थित रूप से तैयार करेंगे या यह केवल एक व्यक्तिगत यात्रा बनकर रह जाएगी। अगले साल लकी जैसे और कितने छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रायोजित किया जाएगा।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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