
India is examining whether Chinese-linked solar cells are entering through Ethiopia to avoid Indian trade barriers. Imports from Ethiopia rose from zero to $202 million in 2025-26, with solar cells accounting for…
भारत यह जांच कर रहा है कि क्या व्यापारिक बाधाओं से बचने के लिए चीन से जुड़ी सौर सेल इथियोपिया के रास्ते भारतीय बाजार में आ रही हैं। लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में इथियोपिया से भारत का आयात शून्य से बढ़कर 20.2 करोड़ डॉलर हो गया है जिसमें 81 प्रतिशत हिस्सा सौर सेल का है। नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों से मूल देश के नियमों के उल्लंघन और शुल्क छूट की जांच करने को कहा है। अमेरिका ने भी चीनी घटकों का उपयोग करने वाले इथियोपियाई सौर उत्पादों के खिलाफ इसी तरह की जांच शुरू की है।

इधर अमेरिकी शुल्क के कारण शिपमेंट धीमी होने से भारतीय निर्माता अब यूरोप की ओर देख रहे हैं। यह अवसर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते और चीन पर निर्भरता कम करने के यूरोपीय प्रयासों पर निर्भर करता है। यूरोप में चीनी पैनल भारतीय उत्पादों की तुलना में 30 प्रतिशत तक सस्ते हैं जबकि वित्त वर्ष 2024 में भारत का मॉड्यूल निर्यात 2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था जो मुख्य रूप से अमेरिका को हुआ।

यह कहना जल्दबाजी होगी कि इथियोपिया से आ रहा हर शिपमेंट चीनी डंपिंग है या यह कि यूरोप भारत के लिए 50 गीगावाट का आसान बाजार है। आयात में अचानक उछाल की जांच होनी चाहिए लेकिन इथियोपिया ने सस्ती बिजली और श्रम का लाभ उठाकर वास्तविक क्षमता भी बढ़ाई हो सकती है। भारतीय निर्यातकों के सामने अभी भी कीमत का अंतर और यूरोपीय नियमों की अनिश्चितता एक चुनौती है। असल परीक्षा यह है कि क्या जांचकर्ता स्थानीय स्तर पर हुए मूल्यवर्धन की पुष्टि कर पाएंगे और क्या भारतीय कंपनियां स्थायी शुल्क संरक्षण के बिना यूरोपीय ऑर्डर हासिल कर सकेंगी।
स्रोत (2): livemint.com, livemint.com (2)
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