
Jammu and Kashmir Chief Minister Omar Abdullah hit back at Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif on Friday, saying the Indus Waters Treaty (IWT) has "sucked the blood" of the region and must…
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को करारा जवाब दिया है और कहा कि इस समझौते ने क्षेत्र के लोगों का खून चूसा है। शरीफ ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों की रक्षा करेगा और भारत को सही रास्ते पर आना होगा वरना उसे सीधे जवाब का सामना करना पड़ेगा। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पिछले साल इस संधि को स्थगित कर दिया था। उमर ने कहा कि यह कदम बरकरार रहना चाहिए।
उमर ने कहा कि 1960 के समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर को तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम के उपयोग से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य चिनाब से पीने का पानी नहीं निकाल सकता और न ही तुलबुल में बैराज बना सकता है। उन्होंने वुलर झील पर तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की मांग दोहराई, जिसे पाकिस्तान की आपत्ति के बाद 1987 में रोक दिया गया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से इस संधि का विरोध करती रही है और इसे जम्मू-कश्मीर विरोधी मानती है।
दोनों पक्ष दिखावा कर रहे हैं। शहबाज शरीफ पानी को पाकिस्तान के लिए एक अहम मुद्दा बताते हैं लेकिन उमर अब्दुल्ला ने सही कहा है कि एक तरफ पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ एकजुटता का दावा करता है और दूसरी तरफ उनकी अपनी नदियों के उपयोग को रोकता है। संधि का निलंबन भारत को फायदा पहुंचाता है लेकिन केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या जम्मू-कश्मीर को अब चिनाब और झेलम का पानी पीने और सिंचाई के लिए मिलेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र औपचारिक रूप से संधि को रद्द करता है या केवल निलंबित रखता है। इससे तय होगा कि किसके जल अधिकारों को प्राथमिकता दी जाती है।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।