
A parliamentary panel has flagged the slow pace of digitisation under the Gyan Bharatam Mission, which aims to digitise one crore manuscripts by 2030. Only 7.5 lakh texts have been digitised so…
संसदीय समिति ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की धीमी गति पर चिंता जताई है। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक एक करोड़ पांडुलिपियों को डिजिटल करना है। राज्यसभा में इस सप्ताह पेश की गई रिपोर्ट में समिति ने कहा कि अब तक केवल 7.5 लाख पांडुलिपियां ही डिजिटल हो पाई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान गति हर महीने लगभग 33,000 पांडुलिपियां है जो 1.5 लाख के निर्धारित लक्ष्य से काफी कम है। समिति ने काम की गति बढ़ाने के लिए जनभागीदारी और मशीनी सहायता लेने की सिफारिश की है। परियोजना की लागत 2024-25 के 3.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 तक 60 करोड़ रुपये हो गई है। पैनल ने नई धनराशि मांगने से पहले मौजूदा फंड का सही इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
ज्ञान भारतम मिशन को शुरू हुए अभी मुश्किल से एक साल हुआ है इसलिए इसे विफल बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन तीन साल में लागत का 17 गुना बढ़ जाना गंभीर चिंता का विषय है। समिति की यह बात सही है कि प्रक्रिया को दुरुस्त किए बिना केवल पैसा खर्च करने से परिणाम नहीं मिलेंगे। असली परीक्षा यह है कि क्या मंत्रालय एआई और जन भागीदारी जैसे माध्यमों को अपनाएगा या फिर अगले साल फिर से अतिरिक्त फंड की मांग करेगा।
स्रोत: thehindu.com
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