
अमेरिका ने भारत समेत 40 से अधिक देशों पर आरोप लगाया है कि वे चीन के सामान को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। बिजनेस…
अमेरिका ने भारत समेत 40 से अधिक देशों पर आरोप लगाया है कि वे चीन के सामान को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। बिजनेस टुडे के अनुसार, व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग मामलों के सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई कॉरिडोर का भी उल्लेख है। रिपोर्ट ने ऐसे अवैध ट्रांसशिपमेंट का अनुमान 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर सालाना लगाया है।

अमेरिका अब ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ नाम का AI सिस्टम तैयार कर रहा है। यह शिपमेंट डेटा, रूट, उत्पादों, कंपनियों के रिश्तों और उत्पादन क्षमता का विश्लेषण करेगा। आरोप है कि 2018 में चीन पर सेक्शन 301 टैरिफ लगने के बाद सामान की पैकिंग, लेबल या मार्ग बदलकर उसका मूल देश छिपाया गया।
इस मामले को चीन का पूरा ‘शैडो नेटवर्क’ या भारत की मिलीभगत बताना जल्दबाजी होगी। स्रोत में आरोपों के स्वतंत्र सत्यापन, भारतीय जांच या किसी खास कंपनी का प्रमाण नहीं दिया गया है। दूसरी ओर, कस्टम डेटा और उत्पादन क्षमता की जांच से वास्तविक गड़बड़ी पकड़ी जा सकती है। असली कसौटी यह होगी कि अमेरिका कितने शिपमेंट रोकेगा और कितने मामलों में अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना साबित कर पाएगा।
Source: bazaar.businesstoday.in
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