
दवा कंपनियों ने गैस, ब्लड प्रेशर, बुखार और दिल की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। कीमतों में 13 रुपये से लेकर 23 रुपये तक की वृद्धि हुई है, जिसका असर नियमित दवा लेने वाले मरीजों पर पड़ा है। कंपनियों ने कच्चे माल और भाड़े की दरें बढ़ने को इसकी वजह बताया है।

यह बढ़ोतरी जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिली राहत को उलट देती है। हृदय रोग, गैस और पेट संबंधी समस्याओं के मरीजों को रोजाना दवा लेनी पड़ती है, जिससे उनका मासिक बजट प्रभावित हुआ है। दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है।
दवा कंपनियों ने जीएसटी कटौती से मिली राहत को कच्चे माल और भाड़े की बढ़ती लागतों से उलट दिया है। नियमित इलाज पर निर्भर मरीजों, विशेषकर गैस, बीपी और दिल की बीमारियों के लिए दवाओं की कीमतों में 13 से 23 रुपये की बढ़ोतरी उनके मासिक बजट को सीधे प्रभावित करती है। इसका सबसे अधिक असर उन पर पड़ा है जो दीर्घकालिक बीमारियों के लिए प्रतिदिन दवा लेते हैं। यह बढ़ोतरी सरकार के हालिया जीएसटी दर घटाने के फैसले के प्रभाव को कम करती है, लेकिन कंपनियों ने इसे इनपुट लागत में वृद्धि से जोड़ा है। खबर में कोई अगला कदम या नियामकीय प्रतिक्रिया नहीं बताई गई है, यह अस्पष्ट है कि सरकार या नियामक दवा की कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई कार्रवाई करेंगे।
Source: amarujala.com
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