
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चोरी और छीने गए फोन का एक संगठित अवैध बाजार चल रहा है। लो और मिड-रेंज फोन पहले बेचने वाले को करीब 1,500…
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चोरी और छीने गए फोन का एक संगठित अवैध बाजार चल रहा है। लो और मिड-रेंज फोन पहले बेचने वाले को करीब 1,500 रुपये तक दिलाते हैं, जबकि हाई-एंड फोन 5,000 रुपये तक बिक सकते हैं। बाद में ये फोन ग्रे मार्केट में 7,000 रुपये या उससे ज्यादा में बेचे जाते हैं।
चोरी के फोन के पार्ट्स अलग-अलग बेचे जाते हैं: स्क्रीन 1,000 से 15,000 रुपये, मदरबोर्ड 1,000 से 15,000, कैमरा 500 से 5,000 और बैटरी 700 से 6,000 रुपये तक। बड़ी संख्या में फोन नेपाल और बांग्लादेश भेजे जाते हैं। वहीं, ZIPNET के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में फोन चोरी घटकर 1.5 लाख रह गई और दिल्ली पुलिस का रिकवरी रेट 74% हो गया।
यह खबर पुलिस की सफलता और संगठित अपराध दोनों को दिखाती है। एक तरफ सीईआईआर और बेहतर रिकवरी से चोरी घटी है, लेकिन दूसरी तरफ फोन के पार्ट्स और विदेशों में सप्लाई का धंधा अब भी फल-फूल रहा है। यह मानना गलत होगा कि समस्या खत्म हो गई। असली परीक्षा यह होगी कि क्या नेपाल-बांग्लादेश जैसे देशों के साथ सहयोग करके इस सप्लाई चेन को तोड़ा जा सकता है।
Source: bazaar.businesstoday.in
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