
अप्रैल से अगस्त के बीच देश में सक्रिय घरेलू LPG ग्राहकों की संख्या में 62 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। यह एक दशक से अधिक समय में पहली बार हुआ…
अप्रैल से अगस्त के बीच देश में सक्रिय घरेलू LPG ग्राहकों की संख्या में 62 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। यह एक दशक से अधिक समय में पहली बार हुआ है। सितंबर की शुरुआत में कुल सक्रिय ग्राहक 327.7 मिलियन रह गए, जो अप्रैल में 333.9 मिलियन थे। सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत जुड़े ग्राहकों की संख्या भी 6 लाख घटकर 105.7 मिलियन रह गई।

गिरावट की बड़ी वजह ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र से LPG सप्लाई पर पड़ा असर है। इस क्षेत्र से भारत का लगभग 90% LPG आयात होता था। सप्लाई सीमित होने के चलते तेल कंपनियों ने नए कनेक्शन जारी करने के बजाय मौजूदा ग्राहकों की जरूरत पूरी करने पर ध्यान दिया। साथ ही, आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से निष्क्रिय और डुप्लीकेट ग्राहकों की पहचान की गई।
क्षेत्र के हिसाब से सबसे ज्यादा गिरावट दक्षिण भारत में हुई, जहां 26.3 लाख ग्राहक कम हुए। पश्चिमी भारत में 16.2 लाख और उत्तरी भारत में 15 लाख ग्राहक घटे। सरकार ने PNG सुविधा वाले इलाकों में LPG से PNG की ओर जाने को प्रोत्साहित किया है, जिससे जुलाई तक 6 लाख नए PNG ग्राहक जुड़े।
यह गिरावट भारत के LPG सब्सिडी और ऊर्जा संक्रमण की दोहरी चुनौती को दिखाती है। एक तरफ ईरान-इज़राइल संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं ने आयात पर निर्भरता की कमजोरी उजागर की, दूसरी तरफ सरकार का PNG को बढ़ावा देना LPG सब्सिडी के बोझ को कम करने की रणनीति का हिस्सा है। उज्ज्वला योजना के ग्राहकों का 6 लाख घटना दिखाता है कि मुफ्त कनेक्शन के बाद रिफिल की सामर्थ्य एक बड़ी बाधा बनी हुई है। अगला अहम संकेत सर्दियों से पहले ईरान की सप्लाई बहाली और अक्टूबर के LPG आयात आंकड़े होंगे।
Source: bazaar.businesstoday.in
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