
मोतिहारी में निर्धारित कीमत से अधिक पर खाद बेचने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बीच खुदरा उर्वरक विक्रेता लामबंद हो गए हैं। उन्होंने सरकार से खाद की क्रय दर तय करने की मांग की है और मांग पूरी न होने तक खाद का उठाव तथा बिक्री बंद करने की चेतावनी दी है।
विक्रेताओं का आरोप है कि थोक विक्रेता और कंपनियां उन्हें अधिक कीमत पर खाद देती हैं, जबकि कार्रवाई खुदरा दुकानदारों पर होती है। राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकारी दर पर बिक्री करने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। दुकानदारों के अनुसार, बिल और वसूली जाने वाली कीमत में अंतर रहता है।
डीएपी, यूरिया और पोटाश की आपूर्ति रुकने पर रबी सीजन में किसानों को परेशानी हो सकती है और कालाबाजारी बढ़ने की आशंका है। अब प्रशासन और सरकार के सामने शिकायतों की जांच कर सप्लाई चेन में जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।
विवाद का असर केवल खुदरा दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि विक्रेता खाद उठाना और बेचना रोकते हैं, तो गेहूं, सरसों और दलहन की बुआई के समय किसानों के लिए उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। विक्रेताओं के आरोपों में थोक कीमत, बिल और वास्तविक वसूली के बीच अंतर की जांच का मुद्दा है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई निर्धारित बिक्री कीमत के उल्लंघन पर केन्द्रित है। इससे जिम्मेदारी तय करने के लिए पूरी आपूर्ति शृंखला की जांच जरूरी बनती है। सरकार के सामने क्रय दर तय करने और शिकायतों की जांच, दोनों मांगें हैं।
Source: bhaskar.com
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