
देशभर में प्याज के खुदरा भाव 60-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि सरकार बफर स्टॉक से एनसीसीएफ और नेफेड के जरिए प्याज 35 रुपये किलो बेच रही है। 16…
देशभर में प्याज के खुदरा भाव 60-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि सरकार बफर स्टॉक से एनसीसीएफ और नेफेड के जरिए प्याज 35 रुपये किलो बेच रही है। 16 सितंबर को औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये किलो रहा, जो पिछले साल के 27.71 रुपये से करीब 94 फीसदी ज्यादा है।

सरकार ने 24 अगस्त से बफर स्टॉक बाजार में उतारना शुरू किया और अब यह आपूर्ति 19 शहरों तक पहुंच गई है। हालांकि, सरकारी प्याज हर बाजार और उपभोक्ता तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे सरकारी और खुले बाजार के भाव में बड़ा अंतर बना हुआ है।
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे रबी स्टॉक खत्म होना और नई खरीफ फसल में देरी है। महाराष्ट्र के नासिक में बुआई करीब 15 दिन पीछे चल रही थी, जबकि कर्नाटक के चित्रदुर्गा-चलकेरे में बुआई सामान्य के 60 फीसदी रह गई। सरकार ने 2026-27 के लिए 2 लाख टन रबी प्याज बफर खरीद का लक्ष्य रखा है।
प्याज की कीमतों का यह उछाल हर साल सितंबर-दिसंबर के बीच आता है, जब रबी का स्टॉक सूखता है और खरीफ की आवक शुरू नहीं हुई होती। सरकार के पास इस साल 1.21 लाख टन बफर स्टॉक है, जो 2 लाख टन के लक्ष्य से कम है और पिछले साल के मुकाबले बफर का आकार भी छोटा है। असली दबाव आपूर्ति श्रृंखला पर है: प्याज उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक से दिल्ली, कोलकाता जैसे बड़े उपभोग केंद्रों तक पहुंचाने में परिवहन और भंडारण की सीमाएं हैं। अगले दो हफ्तों में खरीफ फसल की मंडियों में आवक शुरू होगी, जो कीमतों पर सबसे बड़ा असर डालेगी। यदि आवक देर से हुई, तो सरकार को बफर स्टॉक बढ़ाने या आयात शुल्क में कटौती जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। अभी सबसे बड़ा संकेत खरीफ फसल की पहली खेप का मंडी में पहुंचने का समय होगा।
Source: bazaar.businesstoday.in
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