
अमेरिकी सीनेट ने 86-11 मतों से 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पारित कर दिया। यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल-गैस के शीर्ष पांच आयातकों- चीन, भारत,…
अमेरिकी सीनेट ने 86-11 मतों से 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पारित कर दिया। यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल-गैस के शीर्ष पांच आयातकों- चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया- के सामान पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को मिलने वाले राजस्व को रोकना है। बिल अब मंजूरी के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा जो 31 अगस्त से फिर बैठक करेगा।
भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। केप्लर और एलएसईजी के जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रूस से प्रतिदिन 27 लाख बैरल तेल आयात किया, जो उसके कुल कच्चे तेल के 50% से अधिक है। जुलाई में यह बढ़कर 28 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। चीन ने जून में 29 मिलियन बैरल और जुलाई में 35 मिलियन बैरल कुल क्रूड आयात किया, जिसमें रूसी तेल शामिल है। यह बिल ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है।
इस बिल के पीछे अमेरिका का तर्क साफ है- रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने के लिए राजस्व न दें। लेकिन भारत के लिए यह दुविधा पैदा करता है: सस्ता रूसी तेल छोड़े या अमेरिकी बाजार खोए? भारत ने हमेशा ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, न कि किसी गुटबंदी को। अब असली परीक्षा तब होगी जब यह बिल प्रतिनिधि सभा में पहुंचेगा- क्या भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर इसका दबाव बनेगा या भारत अपने रूसी आयात में कटौती का संकेत देगा?
Sources (2): aajtak.in, aajtak.in (2)
This story was synthesised by AI from the 2 sources linked above.
Updated: this story now draws on 2 sources.