
केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन का बिल ला सकती है. कांग्रेस ने इसे 'ईसाई विरोधी' करार देते हुए जोरदार विरोध का ऐलान किया…
केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन का बिल ला सकती है. कांग्रेस ने इसे 'ईसाई विरोधी' करार देते हुए जोरदार विरोध का ऐलान किया है. पार्टी का कहना है कि इससे दूरदराज और आदिवासी इलाकों में ईसाई संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों पर बुरा असर पड़ेगा.
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष इस बिल को पारित नहीं होने देगा. समाजवादी पार्टी ने अपने सभी सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है. बिल में प्रस्ताव है कि लाइसेंस रद्द होने पर सरकार एक नामित प्राधिकारी नियुक्त करेगी जो संस्थाओं की संपत्तियों और बची राशि का नियंत्रण ले सकेगा.
कांग्रेस इसे ईसाई विरोधी बताकर अल्पसंख्यक वोट बैंक साधना चाहती है, लेकिन सरकार का पारदर्शिता का तर्क भी सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता. असली सवाल यह है: क्या सरकार आगामी तीन दिनों में बिल लाकर विपक्ष के एकजुट विरोध का सामना करेगी, या फिर पहले की तरह पीछे हट जाएगी?
Source: aajtak.in
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