
Nearly 20 to 25 per cent of names could be removed from Delhi's electoral rolls during the ongoing Special Intensive Revision (SIR), election officials say. The estimate is attributed to Delhi's highly…
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से 20 से 25 प्रतिशत नाम हटाए जा सकते हैं। इस अनुमान का कारण दिल्ली की अत्यधिक गतिशील जनसंख्या, सरकारी कर्मचारियों का लगातार तबादला और लोगों का बिना मतदाता पंजीकरण अपडेट कराए घर बदलना है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि यह आंकड़ा एक व्यापक अनुमान है और 17 अगस्त को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने पर वास्तविक संख्या स्पष्ट हो जाएगी। बूथ स्तर के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं का पता लगाया जा रहा है जो अब अपने पंजीकृत पते पर नहीं रहते हैं। इनमें से कई लोग शहर के भीतर ही स्थानांतरित हो गए हैं लेकिन उन्होंने अपना पंजीकरण नहीं बदला है।
मतदाता सूची से 20 से 25 प्रतिशत नाम हटाने की बात चिंताजनक लग सकती है लेकिन यह मतदाता दमन नहीं बल्कि दिल्ली के लोगों के बार-बार स्थान बदलने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। प्रवासी मजदूर, स्थानांतरित नौकरशाह और छात्र लगातार राजधानी में आते-जाते रहते हैं। असली परीक्षा 17 अगस्त को होगी जब सूची का मसौदा जारी किया जाएगा। क्या नाम हटाने का काम गरीब या अनधिकृत कॉलोनियों में केंद्रित होगा। निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार विभाजित यह आंकड़ा ही बताएगा कि यह एक ईमानदार प्रक्रिया है या पक्षपातपूर्ण छंटनी।
स्रोत: thehansindia.com
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