
The Union Ministry of Home Affairs has notified 40 questions for Census 2027, covering caste, religion, Aadhaar, bank accounts, voter ID, passport and driving licence. For the first time since Independence, the…
गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है कि भारत की 2027 की जनगणना में परिवारों से जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, बच्चों की संख्या, बैंक खाते, आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े 40 सवाल पूछे जाएंगे। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत महापंजीयक कार्यालय द्वारा जारी इस प्रश्नावली में माता-पिता की जानकारी, दिव्यांगता और विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच का विवरण भी मांगा गया है।
यह कवायद 2021 की जनगणना के महामारी के कारण टल जाने के वर्षों बाद शुरू हो रही है। पिछली 2011 की जनगणना में भी जाति के आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन सरकार ने संवेदनशीलता का हवाला देते हुए पूर्ण आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे। 40 सवालों वाला यह प्रारूप पिछले दौर की तुलना में अधिक विस्तृत है।
जनगणना एक बार फिर जाति और धर्म के उन पुराने सवालों की ओर लौट रही है, जो अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर संदेह पैदा करते हैं। लेकिन निजता के पैरोकारों को बैंक खातों और आधार को शामिल किए जाने पर भी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे निगरानी और डेटा के दुरुपयोग का डर बढ़ता है। असली परीक्षा सवालों से नहीं बल्कि डेटा एक्सेस को नियंत्रित करने वाले कानून से होगी। क्या संसद 2027 से पहले कोई ऐसा डेटा संरक्षण विधेयक पारित करेगी जो सरकार को बाध्य करे? इसके बिना यह जानकारी बिना किसी सुरक्षा के एक खजाने जैसी होगी।
स्रोत: news.abplive.com
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