
France's Constitutional Council on Friday struck down a law banning social media access for children under 15, ruling that Article 1 was an infringement on freedom of expression that was not appropriate,…
फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने शुक्रवार को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले कानून को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून का अनुच्छेद 1 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और यह उचित या आवश्यक नहीं है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून का समर्थन किया था और सितंबर तक इसे लागू करने का वादा किया था। अब उन्होंने प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू से कहा है कि वे अदालत के फैसले और यूरोपीय नियामक ढांचे के अनुरूप एक नया मसौदा तैयार करें। एलीसी पैलेस ने कहा कि सुधार के प्रति मैक्रों की प्रतिबद्धता बरकरार है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रतिबंध के चलते सभी उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया एक्सेस करने से पहले अपनी आयु साबित करनी पड़ती, जो वयस्कों के लिए भी परेशानी का सबब बनता।

यह फैसला हमें याद दिलाता है कि ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा करना कभी भी आसान नहीं होता। कुछ लोग इसे मुक्त अभिव्यक्ति और सुरक्षा के बीच का चुनाव मानते हैं, लेकिन संवैधानिक परिषद ने एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया है। आयु सत्यापन के कारण हर उपयोगकर्ता को अपनी पहचान साबित करनी पड़ती, जिससे सभी की गोपनीयता खतरे में पड़ जाती। मैक्रों सरकार को अब ऐसा कानून बनाना होगा जो अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखे। असली चुनौती यह होगी कि क्या नया कानून यूरोप के कड़े डेटा नियमों का पालन करते हुए बिना लोगों की निजता का हनन किए प्रभावी हो पाता है या नहीं।
स्रोत (3): hindustantimes.com, thehindu.com, timesnownews.com
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