
A Noida woman, Sarita Gupta, has sparked debate online after questioning how workers can survive on Rs 14,000, 15,000 monthly salaries for 12-hour shifts with no weekly day off. In an Instagram…
नोएडा की रहने वाली सरिता गुप्ता ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाकर बहस छेड़ दी है कि आखिर कर्मचारी 12 घंटे की शिफ्ट और बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के 14,000 से 15,000 रुपये के मासिक वेतन पर अपना गुजारा कैसे करें। सेक्टर 76 में रिकॉर्ड किए गए एक इंस्टाग्राम वीडियो में उन्होंने कहा कि अधिक किराया और काम के लंबे घंटों के कारण उनका परिवार वापस गांव लौटने पर विचार कर रहा है। हालांकि उन्होंने उन्हें स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया यूजर्स ने बड़ी संख्या में सहानुभूति जताई है और वेतन को बहुत कम व साप्ताहिक अवकाश न होने को अस्वीकार्य बताया है। एचटी ने वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
यह वायरल वीडियो दो भ्रामक धारणाओं को जन्म देता है कि प्रवासियों को महंगे शहरों को छोड़ देना चाहिए या यह कि कंपनियां बहुत क्रूर हैं। वास्तविक समस्या वेतन और किराये के बीच का ढांचागत अंतर है। नोएडा में एक कमरे का किराया अक्सर 5,000 रुपये से अधिक होता है जबकि उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 9,765 रुपये प्रति माह है। अब देखना यह है कि क्या श्रम विभाग सेक्टर 76 जैसे इलाकों की जांच करेगा जहां 12 घंटे की शिफ्ट और बिना साप्ताहिक अवकाश के काम करना फैक्ट्री अधिनियम का उल्लंघन है।
स्रोत: hindustantimes.com
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