
Indian American Congressman Raja Krishnamoorthi has warned that a proposed $100,000 fee on new H-1B visas could push US companies to move work abroad. Speaking on the Spill the Tea interview series,…
भारतीय अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी है कि नए H-1B वीजा पर प्रस्तावित एक लाख डॉलर का शुल्क अमेरिकी कंपनियों को अपना काम विदेश ले जाने के लिए मजबूर कर सकता है। ‘स्पिल द टी’ इंटरव्यू सीरीज में बोलते हुए इलिनोइस के डेमोक्रेट सांसद ने कहा कि कंपनियां या तो कुशल प्रतिभाओं को अमेरिका लाएंगी या फिर अपना काम आउटसोर्स कर देंगी। उन्होंने इस शुल्क को विशेष तकनीकी भूमिकाओं वाले पेशेवरों पर कर बताया और कहा कि इससे अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है और कर्मचारी यहां रुकने से हतोत्साहित होंगे।
इंटरव्यू लेने वाले ने उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2024 में 71 प्रतिशत H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को मिले। कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह नीति भारतीय अमेरिकियों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति शत्रुता को सामान्य बनाने का आरोप भी लगाया और वैध आव्रजन प्रणाली में बदलाव की मांग की।
सबसे बड़ा दावा यह है कि यह शुल्क स्वतः ही अमेरिकी तकनीकी नौकरियों को खत्म कर देगा जबकि विपरीत नैरेटिव में हर H-1B कर्मचारी को स्थानीय रोजगार के लिए खतरा माना जाता है। इस रिपोर्ट से कोई भी नतीजा नहीं निकलता। कंपनियां कुछ काम विदेश ले जा सकती हैं लेकिन इसका पैमाना उनकी लागत कौशल की आवश्यकता और भर्ती विकल्पों पर निर्भर करेगा। सही परीक्षण यह है कि क्या इस शुल्क के लागू होने के बाद अमेरिकी निवेश और विशेष नौकरियों का सृजन गिरता है न कि यह कि राजनीतिक बयानबाजी कितनी तेज हो गई है।
स्रोत: greatandhra.com
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