
उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पर इंदौर के एक युवक की कहानी साझा की, जो दो बार जेईई (JEE) में असफल रहा, लेकिन बाद में खुद से प्रोडक्ट…
उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पर इंदौर के एक युवक की कहानी साझा की, जो दो बार जेईई (JEE) में असफल रहा, लेकिन बाद में खुद से प्रोडक्ट डिजाइन सीखकर फ्रीलांसर बन गया। वारिकू के अनुसार, यह युवक अब करीब 2 लाख रुपये प्रति माह कमाता है। हालांकि, इस कमाई और उसके प्रोफेशनल बैकग्राउंड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

वारिकू ने कहा कि भारत में प्रतिभा को पहचानने का तरीका ही समस्या है, लोगों को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री या कंपनी के नाम से आंका जाता है, न कि उनकी असली क्षमता से। उन्होंने उदाहरण दिया कि युवक ने रात में पढ़ाई कर और यूट्यूब की मदद से डिजाइनिंग स्किल हासिल की, और उसका पोर्टफोलियो बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों के बराबर है।
वारिकू ने खुद भी बताया कि वह 18 साल की उम्र में JEE क्लियर नहीं कर पाए थे और बाद में उद्यमिता की राह चुनी। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि क्या सिर्फ बड़े कॉलेज ही सफलता का रास्ता तय करते हैं। ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ने बिना पारंपरिक डिग्री के भी नई स्किल सीखने के रास्ते खोले हैं।
यह कहानी सिर्फ एक युवक की नहीं, बल्कि भारत के उन हजारों छात्रों की है जो हर साल जेईई में असफल होते हैं, 2024 में JEE Main के लिए लगभग 12 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से केवल कुछ प्रतिशत ही IIT में प्रवेश पाते हैं। यह मामला दिखाता है कि फ्रीलांसिंग और ऑनलाइन स्किलिंग के जरिए आय के वैकल्पिक रास्ते खुल रहे हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि शुरुआती संसाधन, जैसे एक इंटरनेट कनेक्शन और एक लैपटॉप, उपलब्ध हों। आगे देखने वाली बात यह है कि क्या सरकार या निजी क्षेत्र ऐसे टैलेंट को पहचानने और मान्यता देने के लिए कोई औपचारिक प्लेटफॉर्म बनाएंगे, जैसा कि नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) के जरिए स्किल को डिग्री के समकक्ष मान्यता देने की कोशिश की जा रही है।
Source: bazaar.businesstoday.in
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