
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 92 बिलियन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 74.5 बिलियन से 23.5% अधिक है। यह ग्रोथ दर पिछले…
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 92 बिलियन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 74.5 बिलियन से 23.5% अधिक है। यह ग्रोथ दर पिछले साल की 33.5% से 10 प्रतिशत अंक कम है। bazaar.businesstoday.in के अनुसार, ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ करीब 20% रही। इस बीच, लोकसभा ने 6 अगस्त को टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 पारित किया, जिससे 2,000 रुपये से अधिक के बड़े मर्चेंट भुगतान पर 0.25-0.40% एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, यह चार्ज ग्राहक से नहीं बल्कि मर्चेंट से लिया जाएगा, और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
UPI की ग्रोथ धीमी होने को लेकर दो चरम विचार सामने हैं। एक कहता है कि UPI अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया, दूसरा कहता है कि एमडीआर लगने से यह खत्म हो जाएगा। सच यह है कि बेस इफेक्ट के कारण ग्रोथ स्वाभाविक रूप से कम हुई है, लेकिन वैल्यू ग्रोथ स्थिर है। एमडीआर सिर्फ व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहीं। असली सवाल यह है: क्या बड़े व्यापारी एमडीआर की भरपाई ग्राहकों को कैशबैक कम करके देंगे? अगले क्वार्टर के ट्रांजैक्शन डेटा से पता चलेगा कि मर्चेंट नेटवर्क पर इसका कितना असर पड़ता है।
Source: bazaar.businesstoday.in
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