
कुतुब मीनार और लाल किले का निर्माण आधुनिक पोर्टलैंड सीमेंट के इस्तेमाल से सदियों पहले हुआ था। आजतक के अनुसार, कुतुब मीनार का निर्माण 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू कराया, जबकि…
कुतुब मीनार और लाल किले का निर्माण आधुनिक पोर्टलैंड सीमेंट के इस्तेमाल से सदियों पहले हुआ था। आजतक के अनुसार, कुतुब मीनार का निर्माण 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू कराया, जबकि लाल किले का निर्माण 1638 में शुरू होकर 1648 में पूरा हुआ। पोर्टलैंड सीमेंट का पेटेंट जोसेफ एस्पडिन ने 1824 में कराया था।

इन इमारतों में पत्थरों और ईंटों को जोड़ने के लिए चूने के गारे का इस्तेमाल हुआ। इसमें चूना, पिसी ईंट यानी सुर्खी, गुड़, बेल-गिरी, गोंद और उड़द दाल जैसी सामग्री मिलाई जाती थी। कुतुब मीनार में पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक भी अपनाई गई। यूनेस्को के रिकॉर्ड में इसके संरक्षण में लाइम मोर्टार के इस्तेमाल का उल्लेख है।

पुराने निर्माण को लेकर यह कहना आसान है कि कारीगरों के पास आधुनिक तकनीक नहीं थी, इसलिए उनका काम रहस्यमय था। दूसरी ओर, यह दावा भी अधूरा है कि केवल गुड़ या उड़द दाल ने सदियों तक इमारतें संभालीं। असली ताकत चूने के सही उपचार, सुर्खी, पत्थर की जमावट और रखरखाव के मेल में थी। संरक्षण परियोजनाओं में आज भी सवाल यही होना चाहिए कि कौन सा मिश्रण मूल संरचना के साथ सबसे सुरक्षित है।
Sources (2): aajtak.in, aajtak.in (2)
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Updated: this story now draws on 2 sources.