सीमेंट से पहले चूने के गारे से बनीं कुतुब मीनार और लाल किला

सीमेंट तो 200 साल पहले आई, फिर ये कुतुब मीनार, लाल किले बनाए कैसे गए थे?

कुतुब मीनार और लाल किले का निर्माण पोर्टलैंड सीमेंट के आने से सदियों पहले हुआ था। जोसेफ एस्पडिन ने 1824 में पोर्टलैंड सीमेंट का पेटेंट कराया, जबकि भारत में पहला सीमेंट संयंत्र…

The Story in Brief

कुतुब मीनार और लाल किले का निर्माण पोर्टलैंड सीमेंट के आने से सदियों पहले हुआ था। जोसेफ एस्पडिन ने 1824 में पोर्टलैंड सीमेंट का पेटेंट कराया, जबकि भारत में पहला सीमेंट संयंत्र 1904 में मद्रास में शुरू हुआ। कुतुब मीनार का निर्माण 1199 में शुरू हुआ और लाल किले का निर्माण 1638 से 1648 के बीच हुआ।

इन इमारतों में पत्थरों और ईंटों को जोड़ने के लिए चूने के गारे का इस्तेमाल किया गया। आजतक के अनुसार, इसमें चूना, पिसी ईंट यानी सुर्खी, गुड़, बताशे, उड़द दाल, बेल-गिरी और गोंद जैसी सामग्री मिलाई जाती थी। पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक ने भी मजबूती बढ़ाई। यूनेस्को के रिकॉर्ड में कुतुब मीनार के संरक्षण में लाइम मोर्टार के इस्तेमाल का उल्लेख है।

The Indian Opinion

पुरानी इमारतों को देखकर यह कहना कि वे किसी रहस्यमय नुस्खे से बनीं, उतना ही गलत है जितना आधुनिक सीमेंट को ही मजबूती का एकमात्र आधार मानना। चूने का गारा, सुर्खी, पत्थरों की सही जमावट और कुशल कारीगरी साथ काम करते थे। हर ऐतिहासिक इमारत में सामग्री का मिश्रण एक जैसा था, यह दावा भी जांच मांगता है। संरक्षण कार्यों में इस्तेमाल होने वाला गारा और मूल निर्माण की संरचना इस बहस का बेहतर प्रमाण होंगे।


Source: aajtak.in

This story was synthesised by AI from the source linked above.

Ask their opinion on this story
They have read this article, our coverage, and the web.
AI simulations of historical figures. Responses are generated from the historical record, not authentic statements.

0 Votes: 0 Upvotes, 0 Downvotes (0 Points)

Share your opinion

Loading Next Post...
Search Trending
Ask their opinion
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

All fields are required.