
चीन ने टनल बोरिंग मशीनों (TBM) और उनके पुर्जों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे भारत की बुलेट ट्रेन, दिल्ली मेट्रो और हिमालय में सीमा सुरंग परियोजनाओं पर संकट गहर गया है। चीन का तर्क है कि ये प्रतिबंध उन देशों पर लागू होंगे जिनके साथ उसका सीमा विवाद है, जिसका सीधा संकेत भारत की ओर है। TBM के उत्पादन में चीन का लगभग 70% एकाधिकार है, और भारत अपनी अधिकांश सुरंग परियोजनाओं के लिए इन मशीनों पर निर्भर रहा है।
भारत के सड़क परिवहन मंत्री पहले ही देश में TBM बनाने की अपील कर चुके हैं। भास्कर के अनुसार, चीन ने पिछले महीने (अक्टूबर 2026) अपने वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से कहा था कि TBM का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों तरह के कामों में हो सकता है, इसलिए इनके निर्यात पर नियंत्रण जरूरी है। इस कदम का असर सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि अमेरिका और अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।
चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीनों (TBM) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से भारत की बुलेट ट्रेन और हिमालयी सुरंग परियोजनाओं पर संकट गहरा गया है। भास्कर ने इस कदम को चीन की वैश्विक रणनीति के तहत रखा, जिसमें अमेरिका, यूरोप और जापान पर भी असर डाला गया, जबकि TV9 ने सीधे भारत के बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया। भास्कर ने शी जिनपिंग की आत्मनिर्भरता की नीति और ‘लॉन्ग मार्च’ के संदर्भ को विस्तार से रेखांकित किया, जबकि TV9 ने चीनी एकाधिकार (70%) और भारत की निर्भरता पर जोर दिया। दोनों स्रोत एकमत हैं कि चीन ने अक्टूबर 2026 में TBM के निर्यात पर नियंत्रण की घोषणा की है। भारत के सड़क परिवहन मंत्री ने देश में इन मशीनों के निर्माण की अपील की है, लेकिन दोनों रिपोर्टों में आगे की कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है।
Coverage: 2 sources, 2 neutral
Sources (2): bhaskar.com (neutral report), tv9hindi.com (neutral report)
This brief was synthesised by AI from the 2 sources linked above, so one read covers every framing they carry. Methodology and corrections.