
आईएमएफ, विश्व आर्थिक परिदृश्य और विश्व बैंक के आँकड़ों पर आधारित तुलना में 2014 से 2026 के बीच भारत ने डॉलर के हिसाब से 6.1% की सालाना औसत ग्रोथ दर्ज की है।…
आईएमएफ, विश्व आर्थिक परिदृश्य और विश्व बैंक के आँकड़ों पर आधारित तुलना में 2014 से 2026 के बीच भारत ने डॉलर के हिसाब से 6.1% की सालाना औसत ग्रोथ दर्ज की है। यह G20 के बड़े देशों में सबसे तेज़ है, जबकि चीन 5.9% और अमेरिका 5.3% से पीछे रहे। इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना से अधिक होकर लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया। कोविड और वैश्विक संकटों के बावजूद यह वृद्धि हुई। हालाँकि, 2004-2014 में भारत की 10.9% की ग्रोथ के बावजूद वह G20 में सातवें स्थान पर था, जबकि चीन 18.3% से पहले था। डॉलर में ग्रोथ पर मुद्रास्फीति और रुपये के उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है, इसलिए इससे सीधे जीवनस्तर का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
सरकारी समर्थक मीडिया इस आँकड़े को बिना संदर्भ के 'भारत का दबदबा' बता रही है, लेकिन डॉलर में ग्रोथ को असली जीवनस्तर से जोड़ना भ्रामक हो सकता है। 2004-2014 में भारत की डॉलर ग्रोथ 10.9% थी, फिर भी वह G20 में सातवें नंबर पर था। असली परीक्षा यह होगी कि रुपये में प्रति व्यक्ति आय और रोज़गार के आँकड़े कितने सुधरते हैं। अगले बजट में खपत और निवेश के आँकड़े ही सच्चाई बताएँगे।
Source: bazaar.businesstoday.in
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