
కేంద్ర ప్రభుత్వం శనివారం నోటిఫికేషన్ జారీ చేసి, దేశవ్యాప్తంగా కులాల వారీగా జనాభాను లెక్కించే ప్రక్రియను ప్రారంభించింది. సెప్టెంబర్ 1 నుంచి వచ్చే ఏడాది ఫిబ్రవరి వరకు ఈ గణన కొనసాగుతుంది. కేంద్ర గణాంక శాఖ ఆధ్వర్యంలో ప్రతి కుటుంబం తమ వివరాలు అందించాల్సి…
केंद्र सरकार ने शनिवार को नोटिफिकेशन जारी कर देशव्यापी जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह गणना 1 सितंबर से शुरू होकर अगले साल फरवरी तक जारी रहेगी। केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के नेतृत्व में प्रत्येक परिवार को अपनी विस्तृत जानकारी देनी होगी। गणना प्रपत्र में 40 प्रश्न शामिल हैं जिसमें एससी और एसटी के साथ जाति का कॉलम भी जोड़ा गया है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार यह जाति जनगणना की जा रही है। टुपाकी की रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में घरों की जानकारी जुटाई जा चुकी है और अब दूसरे चरण में जाति व जनसंख्या गणना की जाएगी। परिवार के मुखिया को इन सभी सवालों के जवाब देने होंगे।

सरकार इस डेटा के आधार पर आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी प्रदान करने की योजना बना रही है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि गणना पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
कुछ लोगों को डर है कि जाति जनगणना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है। हालांकि यह विलंबित सर्वेक्षण एक वास्तविक सामाजिक तस्वीर पेश करने का वैज्ञानिक प्रयास है। पिछड़ों वर्गों के डेटा संग्रह के लिए यह महत्वपूर्ण है। असली परीक्षा इस बात की होगी कि डेटा कितनी पारदर्शिता से जारी किया जाता है और इसका उपयोग आरक्षण सुधारों के लिए कैसे किया जाएगा।
स्रोत (7): aajtak.in, bazaar.businesstoday.in, tupaki.com, tupaki.com (2), tupaki.com (3), tupaki.com (4), tupaki.com (5)
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