
Adults over 50 with abdominal obesity and low Vitamin D face a 123% higher risk of death over six years compared with those who have neither condition, according to a Brazilian study…
डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित ब्राजील के एक अध्ययन के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र के जिन वयस्कों में पेट का मोटापा और विटामिन डी की कमी होती है उनमें छह वर्षों में मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में 123 प्रतिशत अधिक होता है जिनमें ये दोनों समस्याएं नहीं होतीं। फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ कार्लोस और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में हुए इस शोध में इंग्लिश लोंगीट्यूडिनल स्टडी ऑफ एजिंग के 5,520 प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि आंतों की चर्बी विटामिन डी को वसा कोशिकाओं में कैद कर लेती है जिससे यह मुक्त रूप से संचारित नहीं हो पाता और इसके चयापचय के लिए जरूरी एंजाइमों में भी बाधा उत्पन्न होती है। यह दोहरी कमी शरीर में सूजन को बढ़ाती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है जिससे शारीरिक गिरावट तेज होती है तथा हृदय रोगों और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
इस अध्ययन का 123 प्रतिशत का आंकड़ा चिंताजनक तो है लेकिन यह केवल अवलोकन पर आधारित है जो आपसी संबंध दिखाता है न कि कारण। मीडिया विटामिन डी सप्लीमेंट को लेकर घबराहट फैला सकता है लेकिन किसी भी परीक्षण में यह साबित नहीं हुआ है कि विटामिन डी के स्तर को ठीक करने से जोखिम कम हो जाता है। असली सबक यह है कि पेट की चर्बी विटामिन डी को सक्रिय रूप से रोकती है जिससे सूजन और प्रतिरक्षा संबंधी विकारों का एक दुष्चक्र बन जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नियंत्रित अध्ययन यह साबित कर पाते हैं कि केवल गोलियों की तुलना में वजन कम करने से विटामिन डी का चयापचय बेहतर तरीके से बहाल होता है। तब तक कमर के घेरे को नजरअंदाज करके केवल विटामिन डी की कमी को दोष देना तर्कहीन है।
स्रोत: deccanherald.com
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