
The Calcutta High Court has ruled that NEET-UG 2026 candidates who applied as General or OBC-NCL cannot claim EWS reservation after results and counselling begin. Justice Amrita Sinha dismissed a plea by…
कलकत्ता हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि नीट-यूजी 2026 के जो उम्मीदवार जनरल या ओबीसी-एनसीएल श्रेणी में आवेदन कर चुके हैं वे परिणाम घोषित होने और काउंसलिंग शुरू होने के बाद EWS आरक्षण का दावा नहीं कर सकते। जस्टिस अमृता सिन्हा ने आठ उम्मीदवारों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की काउंसलिंग में EWS श्रेणी के तहत शामिल होने की मांग की थी।
अदालत ने कहा कि नीट आवेदन भरते समय उम्मीदवारों के पास वैध EWS प्रमाणपत्र होना जरूरी था। यदि बाद में श्रेणी बदलने की अनुमति दी गई तो इससे अखिल भारतीय मेरिट लिस्ट प्रभावित हो सकती है और उन उम्मीदवारों को नुकसान होगा जिन्होंने समय पर EWS स्थिति घोषित की थी। नीट-यूजी का परिणाम 14 जुलाई 2026 को घोषित किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल का 1 अप्रैल या उसके बाद जारी प्रमाणपत्रों का नियम आवेदन के बाद श्रेणी बदलने की अनुमति नहीं देता है।
यह दावा कि यह फैसला गरीब छात्रों को आरक्षण देने से मना करता है अदालत की मुख्य चिंता को नजरअंदाज करता है। रैंक जारी होने के बाद श्रेणी बदलने से उन उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है। याचिकाकर्ताओं के समय संबंधी मुद्दे यह भी दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय आवेदन प्रक्रिया और राज्य के प्रमाणपत्र नियमों के बीच एक नीतिगत अंतर है। सही परीक्षा यह है कि भविष्य के नोटिस स्पष्ट रूप से बताएं कि EWS प्रमाणपत्र कब तक होना चाहिए और क्या सभी आवेदकों को एक ही समय सीमा मिलती है।
स्रोत: livelaw.in
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