
Nine women at the Assam Khadi and Village Industries Board's Chandmari centre in Guwahati are stitching thousands of national flags for the 80th Independence Day, producing flags worth around Rs 15-16 lakh…
गुवाहाटी में असम खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के चांदमारी केंद्र पर नौ महिलाएं 80वें स्वतंत्रता दिवस के लिए हजारों तिरंगे सिल रही हैं। वे रोजाना 50,000 से 60,000 रुपये मूल्य के झंडे तैयार कर रही हैं और कुल उत्पादन 15 से 16 लाख रुपये तक पहुंच गया है। लगभग 12 लाख रुपये के झंडे असम के बाहर भेजे जा चुके हैं और कुल उत्पादन लक्ष्य 18 लाख रुपये रखा गया है। काम मिलने से महिलाएं खुश तो हैं लेकिन वे मानती हैं कि स्थिति अभी भी नाजुक है। असम भर में बोर्ड का व्यापक उत्पादन नेटवर्क सिकुड़ रहा है और उसे कच्चे माल की कमी व वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई केंद्रों ने काम कम कर दिया है या बंद कर दिया है। मशीनें पुरानी हो चुकी हैं और बोर्ड की कमाई कर्मचारियों का वेतन देने के लिए नाकाफी है। स्वतंत्रता दिवस के ऑर्डर पूरे होते ही यह अस्थायी रौनक खत्म हो सकती है।
नौ महिलाओं द्वारा झंडे सिलने की कहानी सुखद है लेकिन यह उस ढीले नैरेटिव की पोल भी खोलती है कि केवल सरकारी ऑर्डर ही पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित कर सकते हैं। हकीकत यह है कि असम का खादी नेटवर्क लंबे समय से निवेश की कमी और कच्चे माल के अभाव के कारण गिरावट का सामना कर रहा है। स्वतंत्रता दिवस के आसपास काम का अस्थायी उछाल किसी टिकाऊ रणनीति का विकल्प नहीं हो सकता। असली परीक्षा मशीनों के थमने के बाद होगी कि क्या बोर्ड को वह समर्थन मिल पाएगा जिसकी जरूरत इन कर्मचारियों को पूरे साल रोजगार देने के लिए है।
स्रोत: assamtribune.com
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