
An FIR filed on July 22 names seven people in a probe into alleged irregularities in examinations conducted by the Jharkhand Public Service Commission and Jharkhand Staff Selection Commission. The accused include…
झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए 22 जुलाई को सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोपियों में TDPL के निदेशक और कर्मचारी, JPSC के स्टाफ सदस्य और परीक्षा की पूर्व उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता शामिल हैं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद TDPL को गोपनीय परीक्षा कार्य सौंपने में मिलीभगत की गई थी।
जांच में TDPL और अभय कुमार तिवारी के बीच कथित अघोषित संबंध की भी पड़ताल की जा रही है, जिसने कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की हैं और अब वह ब्लॉक आपूर्ति अधिकारी है। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर TDPL परिसर से चार कंप्यूटर बरामद किए हैं, जिनमें से एक में FRO मेन्स-2026 परीक्षा की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं मिली हैं। व्हाट्सएप के जरिए भेजी गई कथित उत्तर कुंजी और OMR कार्बन कॉपी के प्रसार की भी जांच की जा रही है।
सबसे मुखर नैरेटिव या तो पूरी भर्ती प्रणाली को भ्रष्ट घोषित कर देंगे या फिर इन आरोपों को सामान्य कागजी कार्यवाही मान लेंगे। अभी दोनों ही स्थितियां उचित नहीं हैं। FIR और बरामद सामग्री एक पारदर्शी जांच की मांग करती है, लेकिन संदेह को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मुख्य परीक्षण यह है कि क्या कथित TDPL कनेक्शन साबित होता है, ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को कैसे दरकिनार किया गया और क्या वास्तव में परीक्षा का कोई परिणाम प्रभावित हुआ। इन बिंदुओं पर चार्जशीट और सबूत राजनीतिक दावों से कहीं ज्यादा मायने रखेंगे।
स्रोत: timesnownews.com
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