
The Karnataka High Court has ruled that the State SC/ST Commission cannot adjudicate disputes over immovable property title or order mutation of land records. Justice Suraj Govindaraj held the Commission is only…
कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि राज्य का SC/ST आयोग अचल संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा नहीं कर सकता और न ही भूमि रिकॉर्ड में बदलाव का आदेश दे सकता है। जस्टिस सूरज गोविंदराज ने माना कि आयोग केवल एक अनुशंसा करने वाली संस्था है न कि कोई समानांतर अदालत। इस आदेश के जरिए आयोग के 2023 के उस निर्देश को रद्द कर दिया गया जिसमें सिरा तालुक के सीबी अग्रहारा की कुछ वन भूमि को गैर-वन घोषित कर उसे निजी पक्षों के नाम करने का आदेश दिया गया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि यह जमीन 1947 में मैसूर वन विनियमन के तहत वन भूमि के रूप में अधिसूचित की गई थी। कोर्ट ने माना कि आयोग ने मालिकाना हक और भूमि की स्थिति तय करने की कोशिश कर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।
पर्यवेक्षक अक्सर ऐसी न्यायिक टिप्पणियों को हाशिए पर रहने वाले समुदायों के सुरक्षा कवच पर हमले के रूप में देखते हैं। यह एक सतही सोच है। हाई कोर्ट ने केवल वैधानिक सीमाओं को लागू किया है। एक अनुशंसा करने वाली संस्था जमीन के मालिकाना हक पर समानांतर अदालत की तरह काम नहीं कर सकती। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकारी एजेंसियां अब SC/ST दावेदारों की वास्तविक शिकायतों को उचित माध्यमों से तेजी से सुलझाएंगी या फिर प्रक्रिया को एक और बाधा बनने देंगी।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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