
Veteran actor Kitu Gidwani has called Bollywood a “fake industry” with “vague rules”, criticising its treatment of artistes and lack of royalty protections. Speaking to Screen, she said India had no equivalent…
दिग्गज अभिनेत्री कीटू गिडवानी ने बॉलीवुड को अस्पष्ट नियमों वाला एक नकली उद्योग करार देते हुए कलाकारों के साथ हो रहे व्यवहार और रॉयल्टी सुरक्षा के अभाव पर तीखी आलोचना की है। स्क्रीन से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हॉलीवुड के स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड जैसा कोई तंत्र नहीं है और तर्क दिया कि वर्षों तक काम करने के बाद कलाकारों को रॉयल्टी का लाभ मिलना चाहिए। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि एक बार फीस लेने के बाद कलाकारों का अपने बौद्धिक संपदा और रचनात्मक अधिकारों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है।
गिडवानी ने कहा कि अधिक उम्र की महिलाओं को अक्सर सामान्य मां या मौसी के रोल तक सीमित कर दिया जाता है जबकि टेलीविजन अभिनेत्रियों को 30 साल की उम्र से ही दादी के रोल में ढाल दिया जाता है। उन्होंने प्रेम शक्ति कॉमेडी और एक्शन से जुड़े किरदारों की मांग की। गिडवानी ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में होली फिल्म से की थी और वह स्वाभिमान शक्तिमान तथा अर्थ और धोबी घाट जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं।
यह आलस्यपूर्ण दावा कि बॉलीवुड में अधिक उम्र की महिलाओं के लिए कोई सार्थक काम नहीं है बहुत व्यापक है लेकिन गिडवानी की आलोचना मुख्यधारा की कास्टिंग में एक परिचित पैटर्न की ओर इशारा करती है। उनकी मांग विशेष व्यवहार की नहीं बल्कि मजबूत पात्रों और काम पर स्पष्ट अधिकारों की है। केवल उद्योग का आकार ही यह साबित नहीं कर सकता कि यह एक परिपक्व व्यवसाय है। एक उपयोगी परीक्षण यह होगा कि क्या भविष्य के अनुबंध कलाकारों को निरंतर रॉयल्टी देते हैं और क्या अधिक उम्र की अभिनेत्रियों के लिए प्रमुख भूमिकाएं मां और मौसी के दायरे से बाहर निकलती हैं।
स्रोत: bollywoodhungama.com
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