
The Rajasthan government led by chief minister Bhajan Lal will table a uniform civil code bill that exempts tribal communities, sparking debate in southern Rajasthan. The move is described by the Bhajan…
मुख्यमंत्री भजन लाल के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने वाली है जिसमें आदिवासी समुदायों को छूट दी गई है। यह कदम दक्षिणी राजस्थान में बहस का विषय बन गया है। भजन लाल सरकार इसे आदिवासी पहचान के लिए एक निर्णायक मोड़ बता रही है। हालांकि आलोचकों का मानना है कि इससे विभाजन और गहरा हो सकता है। आदिवासी समूहों को मिली छूट विवाद का मुख्य बिंदु है। कुछ लोग इसे पारंपरिक प्रथाओं का संरक्षण बता रहे हैं तो कुछ इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक चाल मान रहे हैं। यह विधेयक फरवरी 2025 में सौंपी गई एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद तैयार किया गया है।
समान नागरिक संहिता से आदिवासियों को बाहर रखने का भजन लाल सरकार का फैसला विविधता के प्रति संवेदनशीलता के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि इसमें राजस्थान में दोहरी नागरिकता की स्थिति पैदा होने का जोखिम भी है। आलोचक इसे आगामी चुनाव से पहले आदिवासी आक्रोश से बचने का दांव बता रहे हैं। वहीं समर्थकों का दावा है कि यह उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करता है। विधेयक पेश होने पर असली परीक्षा होगी। क्या यह मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों को सुरक्षित रखेगा या अनुच्छेद 371 के साथ टकराव को केवल टाल देगा। उत्तराधिकार और विवाह से जुड़े बारीक बिंदुओं पर नजर रखना जरूरी होगा।
Source: ndtv.com
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